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भारत में साइबर अपराध शिकायतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में जहाँ 1.23 लाख शिकायतें दर्ज हुई थीं, वहीं जून 2026 तक यह संख्या घटकर 16,377 रह गई, जो लगभग 75% की कमी दर्शाती है।
सुप्रीम कोर्ट इस स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए है और फोन “किल स्विच”, तेज़ धन-वापसी (Compensation) तथा प्रभावी सुरक्षा उपायों को लागू करने पर विशेष जोर दे रहा है।
हालांकि शिकायतें कम हुई हैं, लेकिन वित्तीय नुकसान अब भी चिंताजनक है।
- वर्ष 2026 में अब तक ₹9,594 करोड़ का वित्तीय नुकसान दर्ज किया गया है।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख आँकड़े
- शिकायतें: 1,23,672 (2024) → 16,377 (जून 2026)
- कमी: लगभग 75%
- धन वापसी: ₹18 करोड़
- लगभग 36,000 पीड़ितों को धन वापस लौटाया गया।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी
अक्टूबर 2025 से सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है और निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:
- RBI को 4 सप्ताह के भीतर म्यूल अकाउंट फ्रीज़ करने हेतु SOP तैयार करने का निर्देश।
- सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में शिकायत निवारण एवं धन-वापसी मॉड्यूल विकसित करने का निर्देश।
- डिजिटल अरेस्ट के पीड़ितों को शीघ्र मुआवज़ा प्रदान करने पर बल।
- फोन “किल स्विच” प्रणाली लागू करने की संभावनाओं पर विचार।
राज्य स्तर पर रुझान
तेलंगाना
- डिजिटल अरेस्ट मामलों में 60% की गिरावट।
- FIR कन्वर्ज़न दर: 16.56% (राष्ट्रीय औसत 1.56%)।
- वर्ष 2026 की पहली छमाही (H1) में ₹616 करोड़ का नुकसान दर्ज हुआ, जबकि 28% धन समय रहते फ्रीज़ कर सुरक्षित किया गया।
उत्तर प्रदेश
- देश में सबसे अधिक साइबर अपराध शिकायतें (लगभग 14%) दर्ज की गईं।
चुनौतियाँ और आगे की दिशा
- पिग बचरिंग, डिजिटल अरेस्ट और क्रिप्टो फ्रॉड जैसे वैश्विक साइबर धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
- शिकायतों में कमी का अर्थ यह नहीं है कि जोखिम समाप्त हो गया है।
- बेहतर शिकायत निवारण, धन रिकवरी और FIR दर्ज होने की बढ़ती दरें सकारात्मक संकेत हैं।
आगे की प्राथमिकताएँ
- सितंबर 2026 तक RBI की म्यूल अकाउंट फ्रीज़ SOP लागू करना।
- फोन “किल स्विच” तकनीक का व्यापक स्तर पर उपयोग।
- साइबर सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता अभियान को और अधिक प्रभावी बनाना।
निष्कर्ष:
भारत में साइबर अपराध शिकायतों में कमी बेहतर प्रवर्तन और पीड़ित सहायता तंत्र की ओर संकेत करती है। फिर भी, अरबों रुपये के वित्तीय नुकसान और लगातार विकसित हो रहे साइबर धोखाधड़ी के तरीकों को देखते हुए सतर्कता, त्वरित धन फ्रीज़िंग, प्रभावी कानूनी कार्रवाई और व्यापक जन-जागरूकता आज भी अत्यंत आवश्यक हैं।
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