मेटा की स्वीकारोक्ति पर भारत सरकार की कार्रवाई और बढ़ता कानूनी दबाव

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मेटा की स्वीकारोक्ति पर भारत सरकार की कार्रवाई और बढ़ता कानूनी दबाव

मेटा ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है कि बड़ी रकम देकर कुछ प्रकार की सामग्री को बढ़ावा और प्रचारित किया गया, जिसमें अवैध और हानिकारक सामग्री भी शामिल थी। कंपनी ने भारत सरकार से कंटेंट मॉडरेशन में हुई चूक के लिए माफी मांगी है। इस स्वीकारोक्ति ने भारतीय अधिकारियों द्वारा जांच शुरू कर दी है और आईटी अधिनियम के तहत मेटा की कानूनी छूट पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य स्वीकारोक्ति (Meta Admissions)

पेड प्रमोशन: मेटा ने स्वीकार किया कि “बहुत पैसा दिया गया” ताकि कुछ प्रकार की सामग्री, जिसमें अवैध सामग्री भी शामिल है, को बढ़ावा दिया जा सके।

अवैध सामग्री: रिपोर्टों में बताया गया कि बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), डीपफेक कंटेंट और धोखाधड़ी वाले विज्ञापन पेड कैंपेन के जरिए प्रमोट किए गए।

राजस्व प्रभाव: आंतरिक दस्तावेज़ों से पता चला कि 2024 में मेटा ने केवल स्कैम विज्ञापनों से लगभग 7 बिलियन डॉलर कमाए, जो उसकी कुल आय का लगभग 10% था।

भारत सरकार की प्रतिक्रिया

माफी: मेटा के Chief Global Affairs Officer Joel Kaplan और CEO Mark Zuckerberg ने व्यक्तिगत रूप से भारत के आईटी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव और अन्य अधिकारियों से माफी मांगी।

कानूनी स्थिति: सरकार ने स्पष्ट किया कि मेटा “इंटरमीडियरी” नहीं है क्योंकि वह सक्रिय रूप से तय करता है कि किसे कौन-सी सामग्री मिले। इसका मतलब है कि सेफ हार्बर सुरक्षा लागू नहीं हो सकती।

• जांच:

  • NCPCR ने CSAM को प्रमोट करने वाले पेड विज्ञापनों पर जांच शुरू की।
  • संसदीय स्थायी समिति ने ज़करबर्ग से तीन दिन में बिना शर्त माफी मांगी है और चेतावनी दी है कि IT Act की धारा 79 के तहत दी गई इम्यूनिटी वापस ली जा सकती है।

विस्तृत परिप्रेक्ष्य (Broader Context)

ऑपरेशनल त्रुटि: मेटा ने यह भी माना कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट गलती से हटाई गई थी, जिसे तकनीकी गड़बड़ी बताया गया।

वैश्विक चिंताएँ: Reuters और NDTV की रिपोर्टों में खुलासा हुआ कि 2024 में मेटा के प्लेटफ़ॉर्म पर रोज़ाना लगभग 15 बिलियन हाई-रिस्क स्कैम विज्ञापन दिखाए गए।

नीति विफलताएँ: मेटा की ऑटोमेटेड सिस्टम केवल तब विज्ञापनदाताओं को बैन करती थी जब 95% धोखाधड़ी का यकीन हो, जिससे कई हानिकारक विज्ञापन बच निकलते थे।

जोखिम और प्रभाव (Risks & Implications)

कानूनी जोखिम: भारत में मेटा सेफ हार्बर सुरक्षा खो सकता है और सीधे तौर पर हानिकारक सामग्री के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

जन विश्वास: अवैध सामग्री से लाभ कमाने की स्वीकारोक्ति उपयोगकर्ताओं का भरोसा कमजोर करती है।

नियामक दबाव: दुनियाभर की सरकारें एल्गोरिदमिक एम्प्लीफिकेशन, पेड प्रमोशन और कंटेंट मॉडरेशन पर कड़े नियम लागू कर सकती हैं।

मेटा का यह स्वीकार करना कि उसने हानिकारक और अवैध सामग्री को प्रमोट करने के लिए बड़ी रकम ली, नियामक जांच का एक अहम मोड़ है। भारत में यह पहले ही सरकारी जांच, कानूनी चेतावनी और जवाबदेही की मांगों को जन्म दे चुका है। वैश्विक स्तर पर, स्कैम विज्ञापनों से अरबों डॉलर की कमाई का खुलासा इस समस्या के पैमाने और सख्त निगरानी की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है।