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CyMAC (Cyber Multi Agency Centre) भारत का एकीकृत साइबर निगरानी और समन्वय केंद्र है, जिसे गृह मंत्रालय के अंतर्गत वर्ष 2025 में स्थापित किया गया। यह साइबर स्पेस की निगरानी, वास्तविक समय में खतरे की जानकारी साझा करने और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है—विशेषकर BRICS सहयोग के दौरान जब साइबर खतरे सीमाओं से परे होते हैं।
CyMAC क्या है?
- स्थापना: जनवरी 2025, मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) ढांचे के अंतर्गत
- मुख्य एजेंसी: गृह मंत्रालय (MHA)
- भागीदार एजेंसियाँ: इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), CERT-In, I4C, NCIIPC, NIC, दूरसंचार विभाग (DoT) और अन्य
- उद्देश्य: साइबर अपराध, साइबर जासूसी, साइबर आतंकवाद, उभरती तकनीकों के दुरुपयोग और राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों का समाधान
साइबर निगरानी में भूमिका
- रीयल-टाइम मॉनिटरिंग: साइबर स्पेस में दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों की सतत निगरानी
- खतरे की जानकारी साझा करना: एजेंसियों को अलर्ट, IOC (Indicators of Compromise) और फॉरेंसिक डेटा साझा करने का सुरक्षित मंच
- समन्वित प्रतिक्रिया: साइबर हमलों पर त्वरित बहु-एजेंसी कार्रवाई, जिससे दोहराव और विलंब कम हो
- VID एवं प्रमाणीकरण सहयोग: UIDAI और CERT-In के साथ मिलकर पहचान प्रणालियों की सुरक्षा और दुरुपयोग रोकथाम
- राष्ट्रीय रक्षा: कानून प्रवर्तन, खुफिया और तकनीकी एजेंसियों को एकीकृत कर भारत की साइबर लचीलापन को मजबूत करना
BRICS संदर्भ में CyMAC
- सीमापार खतरे: BRICS देशों में सक्रिय साइबर अपराध सिंडिकेट्स पर निगरानी और खुफिया आदान-प्रदान में सहयोग
- साइबर कूटनीति: साइबर मानदंडों, निगरानी मानकों और संयुक्त कार्रवाई पर BRICS साझेदारों से जुड़ने का संस्थागत तंत्र
- AI एवं उभरती तकनीकें: AI आधारित साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे के बीच, CyMAC भारत को BRICS चर्चाओं में AI दुरुपयोग पर नियमन हेतु सहयोग देता है
जोखिम एवं चुनौतियाँ
- डेटा संप्रभुता: निगरानी और गोपनीयता अधिकारों के बीच संतुलन
- एकीकरण: सभी एजेंसियों द्वारा CyMAC प्रणालियों का पूर्ण अपनाना
- वैश्विक सहयोग: BRICS देशों के विविध साइबर कानूनों और निगरानी प्रथाओं का सामंजस्य
- उभरते खतरे: AI आधारित धोखाधड़ी, डीपफेक्स और क्वांटम कंप्यूटिंग जोखिमों से निपटने हेतु निरंतर उन्नयन
CyMAC भारत की साइबर निगरानी और समन्वय की रीढ़ है, जो राष्ट्रीय स्तर पर साइबर खतरों से लचीलापन सुनिश्चित करता है। BRICS में यह भारत की क्षमता को सीमापार साइबर अपराध, निगरानी मानकों और उभरती तकनीकी चुनौतियों पर सहयोग करने में सुदृढ़ करता है।
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